The Vision of Śiva· 3.77 / 99

The Vision of Śiva3.77

3.77
व्यवहाराय वा सर्वं व्यवहारो न वस्तुगः । स्वरूपं वस्तुगं विद्धि व्यवहारो न जातुचित् ॥७७॥
vyavahārāya vā sarvaṃ vyavahāro na vastugaḥ | svarūpaṃ vastugaṃ viddhi vyavahāro na jātucit
— व्यवहार के लिए ; — अथवा ; — सब ; — व्यवहार ; — नहीं ; — वस्तु-गत (वास्तविक स्वरूप को छूने वाला) ; — स्वरूप ; — वस्तु-गत ; — जान लो ; — व्यवहार ; — नहीं ; — कभी

अथवा यह सब व्यवहार के लिए (है); व्यवहार वस्तु-गत (वास्तविक स्वरूप को छूने वाला) नहीं। जान लो कि स्वरूप वस्तु-गत है, व्यवहार कभी नहीं।