व्यवहाराय वा सर्वं व्यवहारो न वस्तुगः ।
स्वरूपं वस्तुगं विद्धि व्यवहारो न जातुचित् ॥७७॥
vyavahārāya vā sarvaṃ vyavahāro na vastugaḥ |
svarūpaṃ vastugaṃ viddhi vyavahāro na jātucit
अथवा यह सब व्यवहार के लिए (है); व्यवहार वस्तु-गत (वास्तविक स्वरूप को छूने वाला) नहीं। जान लो कि स्वरूप वस्तु-गत है, व्यवहार कभी नहीं।