विभिन्नशिवपक्षे तु सत्ये दार्ढ्यं परत्र नो ।
प्रतीतिमात्रमेवात्र तावता बन्धमोक्षता ॥७०॥
vibhinnaśivapakṣe tu satye dārḍhyaṃ paratra no |
pratītimātramevātra tāvatā bandhamokṣatā
किन्तु (द्वैतवादियों के) विभिन्न-शिव-पक्ष में, यदि (केवल शिव) सत्य है, तो अन्य (जगत्) में दृढ़ता (सत्यता) नहीं; (जगत्) मात्र प्रतीति होने से, उतने में ही (उनका) बन्ध-मोक्ष (असत्य पर आधारित रह जाता है)।