The Vision of Śiva· 3.70 / 99

The Vision of Śiva3.70

3.70
विभिन्नशिवपक्षे तु सत्ये दार्ढ्यं परत्र नो । प्रतीतिमात्रमेवात्र तावता बन्धमोक्षता ॥७०॥
vibhinnaśivapakṣe tu satye dārḍhyaṃ paratra no | pratītimātramevātra tāvatā bandhamokṣatā
— विभिन्न-शिव-पक्ष में ; — किन्तु ; — सत्य होने पर ; — दृढ़ता (सत्यता) ; — अन्य (जगत्) में ; — नहीं ; — मात्र प्रतीति ही ; — यहाँ ; — उतने में ; — बन्ध-मोक्षता

किन्तु (द्वैतवादियों के) विभिन्न-शिव-पक्ष में, यदि (केवल शिव) सत्य है, तो अन्य (जगत्) में दृढ़ता (सत्यता) नहीं; (जगत्) मात्र प्रतीति होने से, उतने में ही (उनका) बन्ध-मोक्ष (असत्य पर आधारित रह जाता है)।