The Vision of Śiva· 3.71 / 99

The Vision of Śiva3.71

3.71
नासत्ये सत्यबुद्धित्वखण्डनात्रास्ति काचन । कथनं सर्वसाम्याय विवादिहननाय च ॥७१॥
nāsatye satyabuddhitvakhaṇḍanātrāsti kācana | kathanaṃ sarvasāmyāya vivādihananāya ca
— नहीं ; — असत्य में ; — सत्य-बुद्धि का खण्डन ; — यहाँ ; — है ; — कोई ; — यह कथन ; — सर्व-समता के लिए ; — विवादियों के निरसन के लिए ; — और

(हमारे मत में) असत्य में सत्य-बुद्धि का खण्डन — ऐसा कुछ नहीं (क्योंकि हमारे लिए सब सत्य है); यह कथन तो सर्व-समता के लिए और (द्वैतवादी) विवादियों के निरसन के लिए (है)।