The Vision of Śiva· 3.69 / 99

The Vision of Śiva3.69

3.69
विज्ञानमीदृक्सर्वस्य कस्मान्न स्याद्विमोहिता । सैवैषा सा च संसारो बन्धमोक्षावतः स्थितौ ॥६९॥
vijñānamīdṛksarvasya kasmānna syādvimohitā | saivaiṣā sā ca saṃsāro bandhamokṣāvataḥ sthitau
— विज्ञान ; — ऐसा ; — सबको ; — क्यों ; — न हो ; — विमोहिता (मोह की अवस्था) ; — वही (मोह) यह (तिरोहित अवस्था) है ; — और वही ; — संसार ; — बन्ध और मोक्ष ; — इसलिए ; — स्थित हैं

(उत्तर:) ऐसा (शिवत्व का) विज्ञान सबको क्यों न हो? (नहीं होता क्योंकि) विमोहिता (मोह की अवस्था है)। वही (मोह-रूप शिवत्व) यह (तिरोहित अवस्था) है, और वही संसार है; इसलिए बन्ध और मोक्ष (एक ही शिव में) स्थित हैं।