विज्ञानमीदृक्सर्वस्य कस्मान्न स्याद्विमोहिता ।
सैवैषा सा च संसारो बन्धमोक्षावतः स्थितौ ॥६९॥
vijñānamīdṛksarvasya kasmānna syādvimohitā |
saivaiṣā sā ca saṃsāro bandhamokṣāvataḥ sthitau
(उत्तर:) ऐसा (शिवत्व का) विज्ञान सबको क्यों न हो? (नहीं होता क्योंकि) विमोहिता (मोह की अवस्था है)। वही (मोह-रूप शिवत्व) यह (तिरोहित अवस्था) है, और वही संसार है; इसलिए बन्ध और मोक्ष (एक ही शिव में) स्थित हैं।