The Vision of Śiva· 3.67 / 99

The Vision of Śiva3.67

3.67
साऽरोदीदिति वेदेऽस्ति नार्थवादो निरर्थकः । विध्यङ्गत्वेन चेत्सत्ता नासत्यस्याङ्गता स्थिता ॥६७॥
sā'rodīditi vede'sti nārthavādo nirarthakaḥ | vidhyaṅgatvena cetsattā nāsatyasyāṅgatā sthitā
— 'वह रोया' ; — इस प्रकार ; — वेद में ; — है ; — नहीं ; — अर्थवाद ; — निरर्थक ; — विधि के अंग होने के नाते ; — यदि ; — सत्ता (वैधता) ; — नहीं ; — असत्य का ; — अंगत्व ; — ठहरता

'वह रोया' (इत्यादि) वेद में है; (ऐसा) अर्थवाद निरर्थक नहीं। यदि (कहो कि उसकी) सत्ता विधि के अंग होने के नाते (है) — (तो उत्तर) असत्य का अंगत्व नहीं ठहरता (अतः ये वचन भी सत्यता का ही प्रतिपादन करते हैं)।