साऽरोदीदिति वेदेऽस्ति नार्थवादो निरर्थकः ।
विध्यङ्गत्वेन चेत्सत्ता नासत्यस्याङ्गता स्थिता ॥६७॥
sā'rodīditi vede'sti nārthavādo nirarthakaḥ |
vidhyaṅgatvena cetsattā nāsatyasyāṅgatā sthitā
'वह रोया' (इत्यादि) वेद में है; (ऐसा) अर्थवाद निरर्थक नहीं। यदि (कहो कि उसकी) सत्ता विधि के अंग होने के नाते (है) — (तो उत्तर) असत्य का अंगत्व नहीं ठहरता (अतः ये वचन भी सत्यता का ही प्रतिपादन करते हैं)।