पुरुषः सर्व एवेदमितिहासादिषूदितम् ।
महेशस्याष्टमूर्तित्वं यावत्पार्थिवमूढता ॥६६॥
puruṣaḥ sarva evedamitihāsādiṣūditam |
maheśasyāṣṭamūrtitvaṃ yāvatpārthivamūḍhatā
'यह सब पुरुष ही है' — इतिहास आदि में कहा गया है; (और) महेश का अष्टमूर्तित्व, पार्थिव (तत्त्व) की जड़ता तक (व्याप्त है)।