The Vision of Śiva· 3.66 / 99

The Vision of Śiva3.66

3.66
पुरुषः सर्व एवेदमितिहासादिषूदितम् । महेशस्याष्टमूर्तित्वं यावत्पार्थिवमूढता ॥६६॥
puruṣaḥ sarva evedamitihāsādiṣūditam | maheśasyāṣṭamūrtitvaṃ yāvatpārthivamūḍhatā
— पुरुष (विराट्) ; — सब ही है ; — यह ; — इतिहास आदि में ; — कहा गया ; — महेश का ; — अष्टमूर्तित्व ; — जहाँ तक ; — पार्थिव की जड़ता (तक)

'यह सब पुरुष ही है' — इतिहास आदि में कहा गया है; (और) महेश का अष्टमूर्तित्व, पार्थिव (तत्त्व) की जड़ता तक (व्याप्त है)।