The Vision of Śiva· 3.22 / 99

The Vision of Śiva3.22

3.22
नानाविकाररूपेण जडतैवमवस्थिता । तथा सावयवत्वं च पराधीनत्वमेव च ॥२२॥
nānāvikārarūpeṇa jaḍataivamavasthitā | tathā sāvayavatvaṃ ca parādhīnatvameva ca
— नाना विकारों के रूप में ; — जड़ता ; — इस प्रकार ; — अवस्थित ; — तथा ; — सावयवत्व (अंगों से युक्त होना) ; — और ; — और पराधीनता ही

(आक्षेप:) इस प्रकार नाना विकारों के रूप में जड़ता ही (शिव में) अवस्थित हो जाती है; तथा सावयवत्व (अंगों से युक्त होना), और पराधीनता भी —