अथ शक्तेः परावस्था यैर्भक्त्या परिगीयते ।
युक्त्या प्रकाशितो देवस्ततः शक्तिदशा यतः ॥१॥
atha śakteḥ parāvasthā yairbhaktyā parigīyate |
yuktyā prakāśito devastataḥ śaktidaśā yataḥ
अब, जिनके द्वारा शक्ति की परा अवस्था भक्ति से गायी जाती है — (वस्तुतः) युक्ति से प्रकाशित (मूल आधार तो) देव ही है, क्योंकि उससे ही शक्ति की दशा (उत्पन्न होती है)।