The Vision of Śiva· 3.1 / 99

The Vision of Śiva3.1

3.1
अथ शक्तेः परावस्था यैर्भक्त्या परिगीयते । युक्त्या प्रकाशितो देवस्ततः शक्तिदशा यतः ॥१॥
atha śakteḥ parāvasthā yairbhaktyā parigīyate | yuktyā prakāśito devastataḥ śaktidaśā yataḥ
— अब ; — शक्ति की ; — परा अवस्था ; — जिनके द्वारा ; — भक्ति से ; — गायी जाती है ; — युक्ति से ; — प्रकाशित (मूल आधार) ; — देव ; — उससे ; — शक्ति की दशा ; — क्योंकि

अब, जिनके द्वारा शक्ति की परा अवस्था भक्ति से गायी जाती है — (वस्तुतः) युक्ति से प्रकाशित (मूल आधार तो) देव ही है, क्योंकि उससे ही शक्ति की दशा (उत्पन्न होती है)।