The Vision of Śiva· 2.90 / 90

The Vision of Śiva2.90

2.90
तस्यापि कथिता पञ्चतत्त्वदीक्षाविधौ क्वचित् । न वाच इष्यते तद्वत्तस्त्मात्सर्वं शिवात्मकम् ॥९०॥
tasyāpi kathitā pañcatattvadīkṣāvidhau kvacit | na vāca iṣyate tadvattastmātsarvaṃ śivātmakam
— उसकी भी ; — कही गई ; — पंचतत्त्व-दीक्षा की विधि में ; — कहीं ; — नहीं ; — वाक् की ; — इष्ट है ; — उस विशेष रूप से ; — इसलिए ; — सब कुछ ; — शिवात्मक

उसकी (शिवात्मता) भी कहीं पंचतत्त्व-दीक्षा की विधि में कही गई है; उस विशेष रूप से वाक् को (परम-रूप) इष्ट नहीं। इसलिए सब कुछ शिवात्मक है।