कण्ठादौ वदने वायौ व्यापारो वाग्रुतस्य सा ।
करणं, नादरूपादिशब्दस्यास्ति शिवात्मता ॥८९॥
kaṇṭhādau vadane vāyau vyāpāro vāgrutasya sā |
karaṇaṃ, nādarūpādiśabdasyāsti śivātmatā
कण्ठ आदि में, मुख में, वायु में जो वाक् रूप में सुने जाने वाले की व्यापार (क्रिया) है — वह (केवल) करण (इन्द्रिय) है; (फिर भी) नाद-रूप आदि शब्द की शिवात्मता है।