यथा सर्वपदार्थानां भगवच्छिवरूपता ।
तद्वद्वागिन्द्रियस्यापि न पुनः सा परा दशा ॥८८॥
yathā sarvapadārthānāṃ bhagavacchivarūpatā |
tadvadvāgindriyasyāpi na punaḥ sā parā daśā
जैसे समस्त पदार्थों की भगवान् शिव-रूपता है, वैसे ही वाक्-इन्द्रिय की भी (है) — किन्तु इस कारण वह (कोई विशेष) परा दशा नहीं (बन जाती)।