The Vision of Śiva· 2.88 / 90

The Vision of Śiva2.88

2.88
यथा सर्वपदार्थानां भगवच्छिवरूपता । तद्वद्वागिन्द्रियस्यापि न पुनः सा परा दशा ॥८८॥
yathā sarvapadārthānāṃ bhagavacchivarūpatā | tadvadvāgindriyasyāpi na punaḥ sā parā daśā
— जैसे ; — समस्त पदार्थों की ; — भगवान् शिव-रूपता ; — वैसे ही ; — वाक्-इन्द्रिय की भी ; — किन्तु नहीं ; — वह ; — परा दशा

जैसे समस्त पदार्थों की भगवान् शिव-रूपता है, वैसे ही वाक्-इन्द्रिय की भी (है) — किन्तु इस कारण वह (कोई विशेष) परा दशा नहीं (बन जाती)।