तस्मादसाधुः साधुः स्याच्छब्दविद्याफलप्रदः ।
एवं व्याकरणस्यापि समुच्छेद उपैति ते ॥७१॥
tasmādasādhuḥ sādhuḥ syācchabdavidyāphalapradaḥ |
evaṃ vyākaraṇasyāpi samuccheda upaiti te
इसलिए (तुम्हारे असंगत मत में) असाधु (अशुद्ध शब्द) ही साधु (शुद्ध) बनकर शब्द-विद्या के फल का दाता हो जाएगा — और इस प्रकार तुम्हारे व्याकरण का भी समुच्छेद (उन्मूलन) हो जाता है।