The Vision of Śiva· 2.71 / 90

The Vision of Śiva2.71

2.71
तस्मादसाधुः साधुः स्याच्छब्दविद्याफलप्रदः । एवं व्याकरणस्यापि समुच्छेद उपैति ते ॥७१॥
tasmādasādhuḥ sādhuḥ syācchabdavidyāphalapradaḥ | evaṃ vyākaraṇasyāpi samuccheda upaiti te
— इसलिए ; — असाधु (अशुद्ध शब्द) ; — साधु (शुद्ध) ; — होगा ; — शब्द-विद्या के फल का दाता ; — इस प्रकार ; — व्याकरण का भी ; — समुच्छेद (उन्मूलन) ; — आ पड़ता है ; — तुम पर

इसलिए (तुम्हारे असंगत मत में) असाधु (अशुद्ध शब्द) ही साधु (शुद्ध) बनकर शब्द-विद्या के फल का दाता हो जाएगा — और इस प्रकार तुम्हारे व्याकरण का भी समुच्छेद (उन्मूलन) हो जाता है।