The Vision of Śiva· 2.70 / 90

The Vision of Śiva2.70

2.70
पश्यन्त्याश्चेदविद्यात्वं तद्भोगौन्मुख्ययोगतः । मध्यमादेर्जडायाः किं भोगेन शबलात्मना ॥७०॥
paśyantyāścedavidyātvaṃ tadbhogaunmukhyayogataḥ | madhyamāderjaḍāyāḥ kiṃ bhogena śabalātmanā
— पश्यन्ती का ; — यदि ; — अविद्यात्व ; — उस (फल के) भोग के प्रति उन्मुखता के योग से ; — मध्यमा आदि का ; — जड़ का ; — क्या ; — भोग से ; — शबल-स्वरूप

यदि पश्यन्ती का अविद्यात्व उस (फल के) भोग के प्रति उन्मुखता के योग से (आता) है — तो जड़ मध्यमा आदि को शबल-स्वरूप भोग से क्या (प्रयोजन)?