भवतामप्रस्तुतेन न केवलमिहोदितम् ॥७२॥
bhavatāmaprastutena na kevalamihoditam
यहाँ जो तुम्हारे विरुद्ध कहा गया है, वह केवल किसी अप्रस्तुत (असंगत) बात से नहीं कहा गया (अपितु तुम्हारे सिद्धान्त के मर्म पर ही प्रहार है)।
यहाँ जो तुम्हारे विरुद्ध कहा गया है, वह केवल किसी अप्रस्तुत (असंगत) बात से नहीं कहा गया (अपितु तुम्हारे सिद्धान्त के मर्म पर ही प्रहार है)।