स्वानुभूतिर्वर्तमानकालेनास्य विभाव्यते ॥७३॥
svānubhūtirvartamānakālenāsya vibhāvyate
(तुम मानते हो कि) इसकी स्व-अनुभूति वर्तमान काल से ही विभावित (परिकल्पित) होती है —
(तुम मानते हो कि) इसकी स्व-अनुभूति वर्तमान काल से ही विभावित (परिकल्पित) होती है —