The Vision of Śiva· 2.74 / 90

The Vision of Śiva2.74

2.74
अनन्तस्यानुभूतिः का परिच्छेदं विनात्मनः ॥७४॥
anantasyānubhūtiḥ kā paricchedaṃ vinātmanaḥ
— अनन्त की ; — अनुभूति ; — कौन-सी ; — परिच्छेद (सीमा) के बिना ; — आत्मा की

— किन्तु अनन्त आत्मा की परिच्छेद (सीमा) के बिना कौन-सी अनुभूति (हो सकती है, क्योंकि अनुभूति में परिच्छेद उसकी अनन्तता का विरोध करेगा)?