The Vision of Śiva· 2.63 / 90

The Vision of Śiva2.63

2.63
अथ स्वानुभवेनैव पश्यन्तीं पश्य युक्तितः । एवं तर्ह्यपरस्यासौ पश्यन्ती कर्मतां गता ॥६३॥
atha svānubhavenaiva paśyantīṃ paśya yuktitaḥ | evaṃ tarhyaparasyāsau paśyantī karmatāṃ gatā
— अब ; — अपने अनुभव से ही ; — पश्यन्ती को ; — 'देखो!' ; — युक्ति से ; — तब इस प्रकार ; — अन्य (द्रष्टा) के लिए ; — वह ; — पश्यन्ती ; — कर्मता (विषयत्व) को ; — प्राप्त हुई

अब यदि (कहो कि) 'अपने ही अनुभव से युक्तिपूर्वक पश्यन्ती को देखो' — तो ऐसा होने पर वह पश्यन्ती किसी अन्य (द्रष्टा) के लिए कर्म (विषय) बन गई (अतः परम विषयी नहीं रही)।