The Vision of Śiva· 2.62 / 90

The Vision of Śiva2.62

2.62
भवद्भिरेव नाप्तस्याननुभूतार्थवक्तृता ॥६२॥
bhavadbhireva nāptasyānanubhūtārthavaktṛtā
— तुम्हारे द्वारा ही ; — नहीं ; — आप्त (विश्वसनीय वक्ता) का ; — अननुभूत अर्थ की वक्तृता

तुम्हारे द्वारा ही (यह स्वीकृत है कि) आप्त (विश्वसनीय वक्ता) वह नहीं हो सकता जो अननुभूत (स्वयं अननुभव किए) अर्थ का वक्ता हो।