स्फोट एव हि पश्यन्ती तदन्या वा द्वयं भवेत् ।
तदन्यत्वे तदैक्ये वा तदङ्गुल्यग्ररूपया ॥५८॥
sphoṭa eva hi paśyantī tadanyā vā dvayaṃ bhavet |
tadanyatve tadaikye vā tadaṅgulyagrarūpayā
क्या पश्यन्ती स्फोट ही है, अथवा उससे अन्य? यदि अन्य, तो द्वैत होगा; यदि उससे एक — (तो सम्बन्ध ही नहीं बनता) जैसे अंगुली और उसके अग्रभाग का (सम्बन्ध)।