The Vision of Śiva· 2.58 / 90

The Vision of Śiva2.58

2.58
स्फोट एव हि पश्यन्ती तदन्या वा द्वयं भवेत् । तदन्यत्वे तदैक्ये वा तदङ्गुल्यग्ररूपया ॥५८॥
sphoṭa eva hi paśyantī tadanyā vā dvayaṃ bhavet | tadanyatve tadaikye vā tadaṅgulyagrarūpayā
— स्फोट ही ; — निश्चय ही ; — पश्यन्ती ; — उससे अन्य ; — अथवा ; — द्वैत ; — होगा ; — उससे अन्य होने पर ; — उससे एक होने पर ; — अथवा ; — अंगुली और उसके अग्रभाग के (सम्बन्ध) के समान

क्या पश्यन्ती स्फोट ही है, अथवा उससे अन्य? यदि अन्य, तो द्वैत होगा; यदि उससे एक — (तो सम्बन्ध ही नहीं बनता) जैसे अंगुली और उसके अग्रभाग का (सम्बन्ध)।