The Vision of Śiva· 2.50 / 90

The Vision of Śiva2.50

2.50
संहृतः क्रम इत्यस्यां संहर्ता जायते परः । यया क्रमः संहृतो वा किमात्मन्यपरत्र वा ॥५०॥
saṃhṛtaḥ krama ityasyāṃ saṃhartā jāyate paraḥ | yayā kramaḥ saṃhṛto vā kimātmanyaparatra vā
— संहृत (समेटा हुआ) ; — क्रम ; — इस प्रकार ; — इसमें ; — संहर्ता ; — उत्पन्न होता है ; — अन्य ; — जिसके द्वारा ; — क्रम ; — संहृत ; — अथवा ; — क्या ; — अपने में ; — अन्यत्र ; — अथवा

यदि उसमें 'क्रम संहृत है', तो (उससे भिन्न) कोई अन्य संहर्ता उत्पन्न होता है; और जिसके द्वारा क्रम संहृत किया गया, वह — अपने में, अथवा अन्यत्र?