तथापि तद्विभेदन भेदता तदभेदतः ।
न किंचन गृहीतं स्यात्तथान्या संहृतक्रमा ॥४९॥
tathāpi tadvibhedana bhedatā tadabhedataḥ |
na kiṃcana gṛhītaṃ syāttathānyā saṃhṛtakramā
— तब भी, उसके विभेद से भेदता (आएगी); और उसके अभेद से कुछ भी गृहीत नहीं होगा। इसी प्रकार दूसरा (लक्षण) 'संहृत-क्रमा' (भी असंगत है)।