The Vision of Śiva· 2.49 / 90

The Vision of Śiva2.49

2.49
तथापि तद्विभेदन भेदता तदभेदतः । न किंचन गृहीतं स्यात्तथान्या संहृतक्रमा ॥४९॥
tathāpi tadvibhedana bhedatā tadabhedataḥ | na kiṃcana gṛhītaṃ syāttathānyā saṃhṛtakramā
— तब भी ; — उसके विभेद से ; — भेदता ; — उसके अभेद से ; — कुछ भी नहीं ; — गृहीत ; — होगा ; — इसी प्रकार ; — दूसरा (लक्षण) ; — 'संहृत-क्रमा'

— तब भी, उसके विभेद से भेदता (आएगी); और उसके अभेद से कुछ भी गृहीत नहीं होगा। इसी प्रकार दूसरा (लक्षण) 'संहृत-क्रमा' (भी असंगत है)।