नहि तस्या निमित्तं वा कारणं समवायि वा ।
निमित्तत्त्वे पृथक्त्वं स्यात्समवाये तदात्मता ॥३९॥
nahi tasyā nimittaṃ vā kāraṇaṃ samavāyi vā |
nimittattve pṛthaktvaṃ syātsamavāye tadātmatā
क्योंकि उसका (मध्यमा का) न तो निमित्त कारण है, न समवायी (उपादान) कारण: निमित्त होने पर पृथक्त्व आएगा, समवायी होने पर तदात्म्य (एकता आएगी — दोनों ही प्रकार से उसका परा-एकत्व भंग होगा)।