The Vision of Śiva· 2.40 / 90

The Vision of Śiva2.40

2.40
तथाप्यविद्यया योगः पश्यन्त्यात्मानमेव चेत् । अन्धमूकं जगद्बाह्ये सर्वमेव भविष्यति ॥४०॥
tathāpyavidyayā yogaḥ paśyantyātmānameva cet | andhamūkaṃ jagadbāhye sarvameva bhaviṣyati
— तब भी ; — अविद्या से ; — योग ; — पश्यन्ती ; — केवल अपने आत्मा (के साथ) ; — यदि ; — अन्धा और मूक ; — जगत् ; — बाह्य में ; — सब-का-सब ; — हो जाएगा

और तब भी, यदि अविद्या से पश्यन्ती का योग अपने ही आत्मा के साथ है, तो बाह्य जगत् सब-का-सब अन्धा और मूक (गूँगा) हो जाएगा।