तथाप्यविद्यया योगः पश्यन्त्यात्मानमेव चेत् ।
अन्धमूकं जगद्बाह्ये सर्वमेव भविष्यति ॥४०॥
tathāpyavidyayā yogaḥ paśyantyātmānameva cet |
andhamūkaṃ jagadbāhye sarvameva bhaviṣyati
और तब भी, यदि अविद्या से पश्यन्ती का योग अपने ही आत्मा के साथ है, तो बाह्य जगत् सब-का-सब अन्धा और मूक (गूँगा) हो जाएगा।