The Vision of Śiva· 2.41 / 90

The Vision of Śiva2.41

2.41
पश्यन्ती किं शरीरेऽन्तर्बहिः सर्वत्र वा स्थिता ॥४१॥
paśyantī kiṃ śarīre'ntarbahiḥ sarvatra vā sthitā
— पश्यन्ती ; — क्या ; — शरीर में ; — भीतर ; — बाहर ; — सर्वत्र ; — अथवा ; — स्थित

पश्यन्ती क्या शरीर के भीतर है, बाहर है, अथवा सर्वत्र स्थित है?