The Vision of Śiva· 2.42 / 90

The Vision of Śiva2.42

2.42
प्रसरेन्नादबिन्द्वादिसापेक्षा चेदनीश्वरी ॥४२॥
prasarennādabindvādisāpekṣā cedanīśvarī
— प्रसरित होगी ; — नाद-बिन्दु आदि की अपेक्षा रखकर ; — यदि ; — अनीश्वरी (स्वतन्त्र प्रभु नहीं)

यदि वह नाद-बिन्दु आदि की अपेक्षा रखकर प्रसरित होती है, तो वह अनीश्वरी (स्वतन्त्र प्रभु नहीं) है (अतः परम ब्रह्म नहीं हो सकती)।