तत्रापि मध्यमा कस्य कार्यं पश्यन्त्यवस्थया ।
सा जन्या हेतुना केन शबलां जनयेदसौ ॥३८॥
tatrāpi madhyamā kasya kāryaṃ paśyantyavasthayā |
sā janyā hetunā kena śabalāṃ janayedasau
वहाँ भी: मध्यमा किसका कार्य है? वह पश्यन्ती-अवस्था से उत्पन्न होने वाली है; (किन्तु) किस हेतु से और कैसे वह (पश्यन्ती) इस शबल (विचित्र) मध्यमा को उत्पन्न करेगी?