The Vision of Śiva· 2.38 / 90

The Vision of Śiva2.38

2.38
तत्रापि मध्यमा कस्य कार्यं पश्यन्त्यवस्थया । सा जन्या हेतुना केन शबलां जनयेदसौ ॥३८॥
tatrāpi madhyamā kasya kāryaṃ paśyantyavasthayā | sā janyā hetunā kena śabalāṃ janayedasau
— वहाँ भी ; — मध्यमा ; — किसका ; — कार्य ; — पश्यन्ती-अवस्था से ; — वह ; — उत्पन्न होने वाली ; — किस हेतु से ; — किस (कारण) से ; — शबल (विचित्र) को ; — उत्पन्न करे ; — वह

वहाँ भी: मध्यमा किसका कार्य है? वह पश्यन्ती-अवस्था से उत्पन्न होने वाली है; (किन्तु) किस हेतु से और कैसे वह (पश्यन्ती) इस शबल (विचित्र) मध्यमा को उत्पन्न करेगी?