अवाच्यत्वेन भवतां तस्या रूपं गतम् ।
अलक्षितस्वरूपाया अविद्यात्वं कथं स्थितम् ॥३२॥
avācyatvena bhavatāṃ tasyā rūpaṃ gatam |
alakṣitasvarūpāyā avidyātvaṃ kathaṃ sthitam
अवाच्यत्व के द्वारा तो तुम्हारे लिए उसका स्वरूप ही चला गया; और जिसका स्वरूप अलक्षित है, उसका अविद्यात्व कैसे स्थित होगा?