The Vision of Śiva· 2.32 / 90

The Vision of Śiva2.32

2.32
अवाच्यत्वेन भवतां तस्या रूपं गतम् । अलक्षितस्वरूपाया अविद्यात्वं कथं स्थितम् ॥३२॥
avācyatvena bhavatāṃ tasyā rūpaṃ gatam | alakṣitasvarūpāyā avidyātvaṃ kathaṃ sthitam
— अवाच्यत्व के द्वारा ; — तुम्हारे लिए ; — उसका ; — स्वरूप ; — चला गया ; — जिसका स्वरूप अलक्षित है ; — अविद्यात्व ; — कैसे ; — स्थित

अवाच्यत्व के द्वारा तो तुम्हारे लिए उसका स्वरूप ही चला गया; और जिसका स्वरूप अलक्षित है, उसका अविद्यात्व कैसे स्थित होगा?