The Vision of Śiva· 2.33 / 90

The Vision of Śiva2.33

2.33
नचानुमानमिष्टं तेऽप्यवस्थेत्यादिदूषणात् ॥३३॥
nacānumānamiṣṭaṃ te'pyavasthetyādidūṣaṇāt
— और नहीं ; — अनुमान ; — अभीष्ट ; — तुम्हें ; — भी ; — 'यह (केवल) अवस्था है' ; — इत्यादि दूषण के कारण

और न ही (इसमें) अनुमान तुम्हें अभीष्ट है — क्योंकि तुमने स्वयं 'यह तो (केवल) अवस्था है' इत्यादि दूषण दिए हैं।