The Vision of Śiva· 1.36 / 49

The Vision of Śiva1.36

1.36
क्रीडया दुःखवेद्यानि कर्मकारीणि तत्फलेः । संभत्स्यमानानि तथा नरकार्णवगह्वरे ॥३६॥
krīḍayā duḥkhavedyāni karmakārīṇi tatphaleḥ | saṃbhatsyamānāni tathā narakārṇavagahvare
— क्रीड़ा से ; — दुःख-रूप में वेद्य (वस्तुओं) को ; — (बन्धक) कर्म करने वाली ; — अपने फलों के साथ ; — बँधने वाली ; — उसी प्रकार ; — नरक के समुद्र के गह्वर (खाई) में

क्रीड़ा से (वह उन अवस्थाओं को धारण करता है) जो दुःख-रूप में वेद्य हैं, (बन्धक) कर्म करने वाली हैं, अपने फलों के साथ बँधने वाली हैं — उसी प्रकार नरक के समुद्र के गह्वर (खाई) में (जीवों को)।