The Vision of Śiva· 1.37 / 49

The Vision of Śiva1.37

1.37
यथा नृपः सार्वभौमः प्रभावामोदभावितः ॥३७॥
yathā nṛpaḥ sārvabhaumaḥ prabhāvāmodabhāvitaḥ
— जैसे ; — राजा ; — सार्वभौम ; — अपने प्रभाव के आमोद से भावित

जैसे सार्वभौम राजा, अपने प्रभाव के आमोद से भावित होकर —