The Vision of Śiva1.35
स्थानानुरूपतो देहान्देहाकारेण भावनाः ।
आददत्तेन तेनैव रूपेण प्रविभाव्यते ॥३५॥
sthānānurūpato dehāndehākāreṇa bhāvanāḥ |
ādadattena tenaiva rūpeṇa pravibhāvyate
— स्थान के अनुरूप ; — शरीरों को ; — शरीर के आकार से ; — भावनाओं को ; — ग्रहण करता हुआ ; — उस-उस ही ; — रूप से ; — प्रकट किया जाता है, प्रतीत होता है स्थान के अनुरूप शरीरों को, तथा शरीर के आकार से भावनाओं को ग्रहण करता हुआ वह उसी-उसी रूप से प्रकट किया जाता है (प्रतीत होता है)।