तथा नानाशरीराणि भुवनानि तथा तथा ।
विसृज्य रूपं गृह्णाति प्रोत्कृष्टाधममध्यमम् ॥३४॥
tathā nānāśarīrāṇi bhuvanāni tathā tathā |
visṛjya rūpaṃ gṛhṇāti protkṛṣṭādhamamadhyamam
उसी प्रकार नाना शरीरों और भुवनों को वैसे-वैसे विसर्जित (उत्पन्न) करके वह उत्कृष्ट, अधम और मध्यम रूप ग्रहण करता है।