The Vision of Śiva· 1.34 / 49

The Vision of Śiva1.34

1.34
तथा नानाशरीराणि भुवनानि तथा तथा । विसृज्य रूपं गृह्णाति प्रोत्कृष्टाधममध्यमम् ॥३४॥
tathā nānāśarīrāṇi bhuvanāni tathā tathā | visṛjya rūpaṃ gṛhṇāti protkṛṣṭādhamamadhyamam
— उसी प्रकार ; — नाना शरीरों को ; — भुवनों को ; — वैसे-वैसे ; — विसर्जित (उत्पन्न) करके ; — रूप ; — ग्रहण करता है ; — उत्कृष्ट, अधम और मध्यम

उसी प्रकार नाना शरीरों और भुवनों को वैसे-वैसे विसर्जित (उत्पन्न) करके वह उत्कृष्ट, अधम और मध्यम रूप ग्रहण करता है।