तदारूढप्रमितेस्तत्क्षयाज्जीवसङ्क्षयः ॥४१॥
tad-ārūḍha-pramites tat-kṣayāj jīva-saṅkṣayaḥ
sūtra
तत् (आत्मतत्त्व) में आरूढ़ प्रमिति (बोध) वाले के लिए, उस (अभिलाषा) के क्षय से जीव-भाव का संक्षय (विनाश) होता है।
तत् (आत्मतत्त्व) में आरूढ़ प्रमिति (बोध) वाले के लिए, उस (अभिलाषा) के क्षय से जीव-भाव का संक्षय (विनाश) होता है।