— भूत-कञ्चुकी — (पञ्च-)भूतों को (केवल) कञ्चुक/बाह्य आवरण के रूप में धारण करने वाला (पुं. एकवचन, बहुव्रीहि); — तदा — तब (अव्यय); — विमुक्त — मुक्त (पुं. एकवचन, भूत कृदन्त); — भूयः — तत्पश्चात्, पुनः (अव्यय); — पति-सम — परम शिव (पति) के समान (पुं. एकवचन, तत्पुरुष समास); — परः — परम, सर्वोच्च (पुं. एकवचन)
तब (वह) भूतों (पञ्च-तत्त्वों) को (केवल) कञ्चुक (बाह्य आवरण) के रूप में धारण करने वाला, विमुक्त, और तत्पश्चात् पति-सम (परम शिव के समान) परम (हो जाता) है।