Śiva Sūtras · 3.34

Śiva Sūtras 3.34

3.34
तद्विमुक्तस्तु केवली ॥३४॥
tad-vimuktas tu kevalī
sūtra
— तत्-विमुक्त — उससे (सुख-दुःख के द्वन्द्व से) मुक्त (पुं. एकवचन, तत्पुरुष समास) ; — तु — तो, निश्चय ही (अव्यय) ; — केवली — केवली (अकेला, असङ्ग, परम कैवल्य-प्राप्त) (पुं. एकवचन)

उससे (इस द्वैत से) विमुक्त (योगी) तो वस्तुतः केवली (पूर्णतः अकेला, असङ्ग) है।