3.35 मोहप्रतिसंहतस्तु कर्मात्मा ॥३५॥ moha-pratisaṃhatas tu karmātmā sūtra moha-pratisaṃhataḥ — मोह-प्रतिसंहत — मोह से दबा/आक्रान्त (पुं. एकवचन, तत्पुरुष समास) ; tu — तु — किन्तु (अव्यय) ; karma-ātmā — कर्म-आत्मा — कर्म (और उसके फलों) के अधीन आत्मा (पुं. एकवचन, तत्पुरुष समास) किन्तु मोह से प्रतिसंहत (आक्रान्त) कर्मात्मा (कर्म-बद्ध जीव) ही (रह जाता) है।