Śiva Sūtras · 3.33

Śiva Sūtras 3.33

3.33
सुखदुःखयोर्बहिर्मननम् ॥३३॥
sukha-duḥkhayor bahir-mananam
sūtra
— सुख-दुःख का — सुख और दुःख का (नपुं. द्विवचन, सम्बन्ध कारक, द्वन्द्व समास) ; — बहिर्-मनन — बाह्य (विषय-रूप में) मानना (नपुं. एकवचन, तत्पुरुष समास)

(उसके लिए) सुख-दुःख (दोनों) बाह्य (विषयों के समान) माने जाते हैं।