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The Heart of Recognition· 1.9 / 20

The Heart of Recognition1.9

1.9
चिद्वत्तच्छक्तिसङ्कोचान्मलावृतः संसारी ॥९॥
cid-vat tac-chakti-saṅkocān malāvṛtaḥ saṃsārī
sūtra
— यद्यपि चित्-स्वरूप है ; — अपनी शक्तियों के संकोच के कारण ; — मलों से आवृत, अशुद्धियों से ढका हुआ ; — संसारी — संसार में परिभ्रमण करने वाला जीव

चित्-स्वरूप होते हुए भी अपनी शक्तियों के संकोच के कारण मलों से आवृत होकर वह संसारी (संसार में भटकने वाला जीव) बन जाता है।