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The Heart of Recognition· 1.10 / 20

The Heart of Recognition1.10

1.10
तथापि तद्वत् पञ्चकृत्यानि करोति ॥१०॥
tathāpi tad-vat pañca-kṛtyāni karoti
sūtra
— फिर भी, तथापि ; — उस (शिव) के समान ; — पाँच कृत्य (सृष्टि, स्थिति, संहार, तिरोधान, अनुग्रह) ; — करता है

तथापि वह (बद्ध जीव) उस (शिव) के समान ही पाँच कृत्यों को करता है।