The Heart of Recognition · 1.10

The Heart of Recognition 1.10

1.10
तथापि तद्वत् पञ्चकृत्यानि करोति ॥१०॥
tathāpi tad-vat pañca-kṛtyāni karoti
sūtra
— फिर भी, तथापि ; — उस (शिव) के समान ; — पाँच कृत्य (सृष्टि, स्थिति, संहार, तिरोधान, अनुग्रह) ; — करता है

तथापि वह (बद्ध जीव) उस (शिव) के समान ही पाँच कृत्यों को करता है।