The Heart of Recognition · 1.11

The Heart of Recognition 1.11

1.11
आभासनरक्तिविमर्शनबीजावस्थापनविलापनतस्तानि ॥११॥
ābhāsana-rakti-vimarśana-bījāvasthāpana-vilāpanatas tāni
sūtra
— आभासन — प्रकटीकरण (= सृष्टि) ; — रक्ति — आस्वादन (= स्थिति) ; — विमर्शन — विमर्श-रूप ग्रहण (= संहार) ; — बीजावस्थापन — बीज-रूप में स्थापन (= तिरोधान) ; — विलापन — विलय (= अनुग्रह) — इनसे ; — वे पाँच कृत्य (सम्पन्न होते हैं)

वे (पाँच कृत्य) आभासन (प्रकटीकरण = सृष्टि), रक्ति (आस्वादन = स्थिति), विमर्शन (विमर्श = संहार), बीजावस्थापन (बीजरूप में स्थापन = तिरोधान) और विलापन (विलय = अनुग्रह) — इनके द्वारा (सम्पन्न होते हैं)।