— आभासन — प्रकटीकरण (= सृष्टि); — रक्ति — आस्वादन (= स्थिति); — विमर्शन — विमर्श-रूप ग्रहण (= संहार); — बीजावस्थापन — बीज-रूप में स्थापन (= तिरोधान); — विलापन — विलय (= अनुग्रह) — इनसे; — वे पाँच कृत्य (सम्पन्न होते हैं)
वे (पाँच कृत्य) आभासन (प्रकटीकरण = सृष्टि), रक्ति (आस्वादन = स्थिति), विमर्शन (विमर्श = संहार), बीजावस्थापन (बीजरूप में स्थापन = तिरोधान) और विलापन (विलय = अनुग्रह) — इनके द्वारा (सम्पन्न होते हैं)।