तदपरिज्ञाने स्वशक्तिभिर्व्यामोहितता संसारित्वम् ॥१२॥
tad-aparijñāne sva-śaktibhir vyāmohitatā saṃsāritvam
sūtra
उस (स्वस्वरूप) का परिज्ञान न होने पर अपनी ही शक्तियों से मोहित हो जाना ही संसारित्व (बद्ध दशा) है।
उस (स्वस्वरूप) का परिज्ञान न होने पर अपनी ही शक्तियों से मोहित हो जाना ही संसारित्व (बद्ध दशा) है।