The Heart of Recognition · 1.12

The Heart of Recognition 1.12

1.12
तदपरिज्ञाने स्वशक्तिभिर्व्यामोहितता संसारित्वम् ॥१२॥
tad-aparijñāne sva-śaktibhir vyāmohitatā saṃsāritvam
sūtra
— उस (स्वस्वरूप) का परिज्ञान न होने पर ; — अपनी ही शक्तियों के द्वारा ; — व्यामोहित अवस्था — पूर्णतः मोहग्रस्त होने की स्थिति ; — संसारित्व — संसार में बद्ध रहने का स्वरूप

उस (स्वस्वरूप) का परिज्ञान न होने पर अपनी ही शक्तियों से मोहित हो जाना ही संसारित्व (बद्ध दशा) है।