yān yān kāmayate kāmāṃs tān tāñ cchīghram avāpnuyāt |
ajñaḥ pratyakṣatām eti sarvajñatvaṃ na saṃśayaḥ
— जिन-जिन (कामनाओं) को (वितरणात्मक); — इच्छा करता है, चाहता है; — कामनाएँ — इच्छित विषय; — उन-उन को (वितरणात्मक); — शीघ्र, तुरन्त (शीघ्रम्); — प्राप्त कर लेता है; — अज्ञ — अज्ञानी जन; — प्रत्यक्षता — साक्षात् बोध की अवस्था; — प्राप्त होता है, पहुँचता है; — सर्वज्ञत्व — सर्वज्ञता; — नहीं; — संशय — कोई संशय नहीं
जिन-जिन कामनाओं की वह इच्छा करता है, उन-उन को वह शीघ्र प्राप्त कर लेता है; अज्ञ भी प्रत्यक्षता (साक्षात् बोध) को प्राप्त होता है और सर्वज्ञत्व को — इसमें कोई संशय नहीं।