— आदि और अन्त से रहित; — बीज — बीजाक्षर; — विकसित होते हुए, खिलते हुए; — तिथियों (स्वरों) के मध्य स्थित; — हृदय-कमल के भीतर निहित (हृत्-पद्म); — ध्यान करे; — सोम-किरण — चन्द्र-रश्मि (अमृत-धारा); — नित्य, निरन्तर; — अभ्यास करे, साधे
आदि और अन्त से रहित, विकसित होते हुए, तिथियों के मध्य स्थित, हृदय-कमल के भीतर निहित उस बीज का ध्यान करे — उस सोम-किरण (चन्द्र-रश्मि) का — और नित्य अभ्यास करे।