Verses on the Recognition of the Lord· 8.9 / 11

Verses on the Recognition of the Lord8.9

8.9
उल्लेखस्य सुखादेश् च प्रकाशो बहिर् आत्मना इच्छातो भर्तुर् अध्यक्षरूपो ऽक्षादिभुवां यथा ॥९॥
ullekhasya sukhādeś ca prakāśo bahir ātmanā icchāto bhartur adhyakṣarūpo 'kṣādibhuvāṃ yathā
— उल्लेख का ; — सुख आदि का ; — और ; — प्रकाश, प्रकाशन ; — बाहर ; — (अपने) स्वरूप से ; — इच्छा से ; — भर्ता (ईश्वर) की ; — प्रत्यक्ष (अध्यक्ष) रूप वाला ; — इन्द्रिय आदि से उत्पन्न (आभासों) के ; — जैसे

और उल्लेख तथा सुख आदि का बाहर अपने स्वरूप में प्रकाशन, भर्ता (ईश्वर) की इच्छा से, प्रत्यक्ष-रूप (अध्यक्ष-स्वरूप) होता है — जैसे इन्द्रिय आदि से उत्पन्न (आभास होते हैं)।