Verses on the Recognition of the Lord· 8.6 / 11

Verses on the Recognition of the Lord8.6

8.6
आन्तरत्वात् प्रमात्रैक्ये नैषां भेदनिबन्धना अर्थक्रियापि बाह्यत्वे सा भिन्नाभासभेदतः ॥६॥
āntaratvāt pramātraikye naiṣāṃ bhedanibandhanā arthakriyāpi bāhyatve sā bhinnābhāsabhedataḥ
— (उनके) आन्तरिक होने के कारण ; — प्रमाता की एकता में ; — नहीं ; — इन (आभासों) की ; — भेद पर आश्रित ; — अर्थक्रिया (कार्य-साधकता) ; — भी ; — बाह्यता होने पर ; — वह (अर्थक्रिया) ; — भिन्न आभासों के भेद से (उत्पन्न होती है)

आन्तरिक होने के कारण, प्रमाता की एकता में इन (आभासों) की अर्थक्रिया भी भेद पर आश्रित नहीं होती; केवल बाह्यता होने पर ही वह भिन्न आभासों के भेद से उत्पन्न होती है।