— चित्-स्वरूप होने पर; — आभासों की; — भीतर ही; — स्थिति; — सदा; — माया के द्वारा; — प्रतिभासित होने वालों की (वर्तमान कृदन्त); — (उनकी मानी हुई) बाह्यता के कारण; — बाहर; — भी; — वह (स्थिति)
चित्-स्वरूप होने के कारण आभासों की स्थिति सदा भीतर ही है; और माया के द्वारा प्रतिभासित होने वालों की, उनकी (मानी हुई) बाह्यता के कारण, वह स्थिति बाहर भी (कही जाती है)।