Verses on the Recognition of the Lord· 8.5 / 11

Verses on the Recognition of the Lord8.5

8.5
भावाभावावभासानां बाह्यतोपाधिर् इष्यते नात्मा सत्ता ततस् तेषाम् आन्तराणां सतां सदा ॥५॥
bhāvābhāvāvabhāsānāṃ bāhyatopādhir iṣyate nātmā sattā tatas teṣām āntarāṇāṃ satāṃ sadā
— भाव और अभाव के आभासों की ; — बाह्यता ; — उपाधि — आगन्तुक विशेषण ; — मानी जाती है (कर्मवाच्य, √इष्) ; — नहीं ; — आत्मा (स्वरूप) ; — सत्ता (अस्तित्व) ; — इसलिए ; — उन (आभासों) की ; — आन्तरिक (आभासों) की ; — सत् (विद्यमान) (वर्तमान कृदन्त, √अस्) ; — सदा

भाव और अभाव के आभासों की बाह्यता उपाधि (आगन्तुक विशेषण) मानी जाती है, उनका आत्मा (स्वरूप) नहीं; इसलिए उनकी सत्ता सदा आन्तरिक तथा नित्य-सत् रूप ही है।