Verses on the Recognition of the Lord· 7.8 / 14

Verses on the Recognition of the Lord7.8

7.8
नैवं शुद्धस्थलज्ञानात् सिद्ध्येत् तस्याघटात्मना न तूपलब्धियोग्यस्याप्य् अत्राभावो घटात्मनः ॥८॥
naivaṃ śuddhasthalajñānāt siddhyet tasyāghaṭātmanā na tūpalabdhiyogyasyāpy atrābhāvo ghaṭātmanaḥ
— ऐसा नहीं ; — शुद्ध (खाली) स्थल के ज्ञान से ; — सिद्ध हो (विधि, √सिध्) ; — उस (भूतल) का ; — अघट-स्वरूप रूप में ; — किन्तु नहीं ; — उपलब्धि-योग्य (वस्तु) के ; — भी ; — यहाँ ; — अभाव ; — घट-स्वरूप (वस्तु) का

(उत्तर:) ऐसा नहीं है। शुद्ध (खाली) स्थल के ज्ञान से तो केवल यही सिद्ध होगा कि उस (भूतल) का स्वरूप अघट है; किन्तु यहाँ उपलब्धि-योग्य घट-स्वरूप वस्तु के अभाव (का ज्ञान) नहीं होता।