Verses on the Recognition of the Lord· 7.3 / 14

Verses on the Recognition of the Lord7.3

7.3
देशकालक्रमजुषाम् अर्थानां स्वसमापिनाम् सकृदाभाससाध्यो ऽसाव् अन्यथा कः समन्वयः ॥३॥
deśakālakramajuṣām arthānāṃ svasamāpinām sakṛdābhāsasādhyo 'sāv anyathā kaḥ samanvayaḥ
— देश-काल के क्रम से युक्त (अर्थों) का ; — अर्थों का ; — अपने में ही समाप्त (स्वतन्त्र) का ; — एक साथ आभास से सिद्ध होने योग्य ; — यह (समन्वय) ; — अन्यथा ; — कौन-सा? ; — समन्वय — संगति, परस्पर अन्वय

देश-काल के क्रम से युक्त, अपने में ही समाप्त (स्वतन्त्र) इन अर्थों का यह (समन्वय) एक साथ आभास होने से ही सिद्ध हो सकता है; अन्यथा कौन-सा समन्वय (संगति) सम्भव होगा?