Verses on the Recognition of the Lord· 7.4 / 14

Verses on the Recognition of the Lord7.4

7.4
प्रत्यक्षानुपलम्भानां तत्तद्भिन्नांशपातिनाम् कार्यकारणतासिद्धिहेतुतैकप्रमातृजा ॥४॥
pratyakṣānupalambhānāṃ tattadbhinnāṃśapātinām kāryakāraṇatāsiddhihetutaikapramātṛjā
— प्रत्यक्षों और अनुपलम्भों (अप्रत्यक्षताओं) का ; — उस-उस भिन्न अंश पर पड़ने वाले ; — कार्य-कारणता की सिद्धि का हेतु होना ; — एक प्रमाता से उत्पन्न

उस-उस भिन्न अंश पर पड़ने वाले प्रत्यक्ष और अनुपलम्भों (अप्रत्यक्षताओं) की कार्य-कारण-भाव को सिद्ध करने की हेतुता एक प्रमाता से ही उत्पन्न होती है।